स्तनपान के दौरान बच्चों की मौत का कारण क्या है?

केरल में बीते एक साल में छह बच्चों की मौत ब्रेस्टफ़ीड यानी स्तनपान के दौरान हो गई है. दो बच्चों की अटॉप्सी में ये बात साबित भी हो गई है.

बाकी चार बच्चों की मौत भी मां का दूध पीने के दौरान ही हुई लेकिन परिवारवालों के पोस्टमॉर्टम कराने से मना करने के कारण मौत के सही कारणों का पता नहीं चल पाया है.

सबसे ताज़ा मामला एक सप्ताह पुराना है, जिसमें केरल के पालक्काड ज़िले के अटापड्डी में एक बच्चे की मौत मां का दूध पीने के दौरान हो गई.

यहां के गवर्नमेंट ट्राइबल स्पेशिएलिटी हॉस्पिटल के नोडल ऑफ़िसर आर प्रभुदास का कहना है कि बीते एक साल में 6 ऐसे मामले सामने आए हैं जिनमें दूध पीने के दौरान बच्चों की मौत हो गई.

दिल्ली स्थित पीडियाट्रिशियन और चाइल्ड स्पेशलिस्ट डॉक्टर दिनेश सिंघल का कहना है, "बच्चों की मौत की वजह मां का दूध तो नहीं हो सकता. हां, ये हो सकता है कि ब्रेस्टफ़ीड कराने के दौरान मां से कुछ लापरवाही हुई हो और उस वजह से बच्चे की मौत हो गई हो."

डॉ. सिंघल का कहना है, "सबसे पहले लोगों को ये समझने की ज़रूरत है कि इन मौतों का ब्रेस्टफ़ीड से सीधे तौर पर कुछ लेना-देना नहीं है."

"दरअसल, कई बार होता ये है कि मां जब बच्चे को दूध पिला रही होती है तो दूध बच्चे की फ़ूड पाइप (खाने की नली) में जाने की बजाय विंड पाइप (सांस की नली) में चला जाता है, जिसे ट्रैकिया कहते हैं. विंड पाइप से ये दूध फेफड़ों में चला जाता है, जिससे बच्चे की मौत हो सकती है."

डॉ. सिंघल का कहना है कि डिलीवरी के बाद हर मां को बच्चे को सही तरीके से ब्रेस्टफ़ीड कराने की जानकारी दी जाती है. मां को बताया जाता है कि ब्रेस्टफ़ीड कराने के दौरान बच्चे को कभी भी स्ट्रेट यानी सीधी पोज़िशन में न रखें.

वो मानते हैं कि ब्रेस्टफ़ीड कराने से जुड़ी सबसे ज़्यादा परेशानी तब आती है जब मांएं सोकर दूध पिलाती हैं.

ये कई मामलों में ख़तरनाक हो सकता है. इससे दूध सांस की नली में जाने की आशंका होती है जिससे बच्चे की जान को ख़तरा हो सकता है.

 कोई और कारण भी हो सकता है?
इस पर डॉ. सिंघल कहते हैं कि कई बार ऐसा भी होता है कि बच्चे को जन्म देने के दौरान मां को कोई संक्रामक बीमारी हो, जो आगे चलकर बच्चे को भी हो जाए और फिर उस कारण बच्चे की मौत हो जाए.

एनएचएस (अमरीकी राष्ट्रीय स्वास्थ्य सेवा संस्था) के अनुसार, पहली बार मां बनी औरतों के लिए ब्रेस्टफ़ीड कराना थोड़ा मुश्किल और अजीब हो सकता है. लेकिन, इसमें डरने जैसा कुछ भी नहीं है. ये एक ऐसी प्रक्रिया है जो बच्चा और मां साथ-साथ सीखते हैं.

मां अपने और बच्चे की सहूलियत के हिसाब से बच्चे को ब्रेस्टफ़ीड करा सकती है लेकिन ब्रेस्टफ़ीड कराने के दौरान कुछ बातों का ध्यान रखना ज़रूरी है.

एनएचएस के अनुसार स्तनपान कराते वक्त इन बातों का ध्यान रखा जाना चाहिए-

क्या आप आरामदेह स्थिति में हैं? मां का कम्फ़र्टेबल होना सबसे ज़रूरी है. ज़रूरी हो तो तकिये या कुशन का इस्तेमाल कर सकते हैं. मां की बांहें और कंधे आराम की मुद्रा में होने चाहिए.
क्या आपके बच्चे का सिर और शरीर एक सीध में है?
बच्चे की गर्दन, कंधे और पीठ को अपने हाथ का सहारा दें.
ब्रेस्टफ़ीड कराने के लिए बच्चे की ओर झुकें नहीं.
सबसे पहले निप्पल को बच्चे की नाक के पास ले जाएं और बच्चे को कोशिश करने दें कि वो अपना पूरा मुंह खोलें.

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